Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.47.20-21h: 'जब श्री रघुनाथजी मेरे साथ वन में आने लगे, तब लक्ष्मण भी धनुष लेकर उनके पीछे-पीछे चले। इस प्रकार श्री राम मुझे और अपने छोटे भाई को लेकर इस दण्डकारण्य में आए हैं। वे दृढ़ निश्चयी, सदा धर्म में तत्पर रहने वाले तथा सिर पर जटाएँ धारण किए हुए तपस्वी वेश में यहाँ निवास करते हैं।॥20 1/2॥ | ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'जब श्री रघुनाथजी मेरे साथ वन में आने लगे, तब लक्ष्मण भी धनुष लेकर उनके पीछे-पीछे चले। इस प्रकार श्री राम मुझे और अपने छोटे भाई को लेकर इस दण्डकारण्य में आए हैं। वे दृढ़ निश्चयी, सदा धर्म में तत्पर रहने वाले तथा सिर पर जटाएँ धारण किए हुए तपस्वी वेश में यहाँ निवास करते हैं।॥20 1/2॥
‘When Shri Raghunathji started coming to the forest with me, Lakshmana also followed him with a bow in his hand. In this way, Shri Ram has come to this Dandakaranya with me and his younger brother. He is a man of firm resolve and is always devoted to Dharma and lives here in the guise of an ascetic with matted hair on his head.॥ 20 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥