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ramayan 3.47.13-14h: जब श्री रामचन्द्रजी राज्याभिषेक के लिए अपने पिता के पास आए, तब कैकेयी ने तुरन्त ही यह बात मेरे पति को बताई।   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.47.13-14h 
अभिषेकाय तु पितु: समीपं राममागतम्॥ १३॥
कैकेयी मम भर्तारमित्युवाच द्रुतं वच:।
 
 
अनुवाद
जब श्री रामचन्द्रजी राज्याभिषेक के लिए अपने पिता के पास आए, तब कैकेयी ने तुरन्त ही यह बात मेरे पति को बताई।
 
When Shri Ramachandraji came near his father for the coronation, Kaikeyi immediately told this to my husband. 13 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)