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ramayan 3.47.12-13h: 'उनके पिता महाराज दशरथ ने स्वयं कामातुर होकर कैकेयी को प्रसन्न करने की इच्छा से श्री राम का अभिषेक नहीं किया। 12 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  3.47.12-13h 
कामार्तश्च महाराज: पिता दशरथ: स्वयम्॥ १२॥
कैकेय्या: प्रियकामार्थं तं रामं नाभ्यषेचयत्।
 
 
अनुवाद
'उनके पिता महाराज दशरथ ने स्वयं कामातुर होकर कैकेयी को प्रसन्न करने की इच्छा से श्री राम का अभिषेक नहीं किया। 12 1/2॥
 
'His father Maharaj Dasharatha, being sexually aroused himself, did not anoint Shri Ram with the desire to please Kaikeyi. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)