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श्लोक  3.44.2 
ततस्त्रिविनतं चापमादायात्मविभूषणम्।
आबध्य च कपालौ द्वौ जगामोदग्रविक्रम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, महाबली रघुनाथजी तीन स्थानों पर प्रणाम करके, हाथ में अपना सुन्दर धनुष लेकर तथा पीठ पर दो तरकस बाँधकर वहाँ से चले गये।
 
Thereafter, the mighty Raghunatha, bowing down at three places, taking his ornamental bow in his hand and tying two quivers on his back, went away from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)