Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.43.9: सीता ने, जिनकी विचार-शक्ति मारीच के छल से हर ली गई थी, शुद्ध मुस्कान के साथ, लक्ष्मण को उपरोक्त वचन कहते हुए रोक दिया और स्वयं बड़े हर्ष से बोलीं - | ramayan सर्ग 3.43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सीता ने, जिनकी विचार-शक्ति मारीच के छल से हर ली गई थी, शुद्ध मुस्कान के साथ, लक्ष्मण को उपरोक्त वचन कहते हुए रोक दिया और स्वयं बड़े हर्ष से बोलीं -
Sita with a pure smile, whose power of thinking had been taken away by Maricha's deceit, stopped Lakshmana while he was saying the above words and said herself with great joy -
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥