श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.43.39 
एतेन हि नृशंसेन मारीचेनाकृतात्मना।
वने विचरता पूर्वं हिंसिता मुनिपुंगवा:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'क्योंकि अशुद्ध (दुष्ट) मन वाला क्रूर व्यक्ति मारीच पहले वन में घूमते समय कई महान ऋषियों को मार डाला था।
 
'Because Maricha, the cruel person with an impure (evil) mind, had earlier killed many great sages while roaming in the forest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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