Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.43.32: राजा लोग भी विशाल वनों में शिकार करके धन संचय करते हैं; क्योंकि वहाँ मणि, रत्न और सुवर्ण आदि नाना प्रकार की धातुएँ पाई जाती हैं॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 3.43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.43.32 
धनानि व्यवसायेन विचीयन्ते महावने।
धातवो विविधाश्चापि मणिरत्नसुवर्णिन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजा लोग भी विशाल वनों में शिकार करके धन संचय करते हैं; क्योंकि वहाँ मणि, रत्न और सुवर्ण आदि नाना प्रकार की धातुएँ पाई जाती हैं॥ 32॥
 
‘Kings also accumulate wealth in vast forests through the pursuit of hunting; for there are found precious stones, precious stones, and various kinds of metals containing gold etc.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)