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ramayan 3.43.27: ‘मृग के शरीर पर सुवर्णमय बिन्दुओं से युक्त, घुमावदार और सीधे सुन्दर रोम अत्यन्त सुन्दर लगते हैं।॥27॥   |   ramayan सर्ग 3.43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.43.27 
प्रतिलोमानुलोमाश्च रुचिरा रोमराजय:।
शोभन्ते मृगमाश्रित्य चित्रा: कनकबिन्दुभि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘मृग के शरीर पर सुवर्णमय बिन्दुओं से युक्त, घुमावदार और सीधे सुन्दर रोम अत्यन्त सुन्दर लगते हैं।॥27॥
 
‘The curved and straight beautiful hairs of the deer, supported by golden dots on its body, look very beautiful.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)