Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.43.21: यद्यपि अपने पति को स्वेच्छा से इस कार्य में प्रवृत्त करना घोर अत्याचार है और पतिव्रता स्त्रियों के लिए उचित नहीं माना जाता, तथापि इस पशु के शरीर ने मेरे हृदय में भय उत्पन्न कर दिया है (इसीलिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप इसे पकड़कर यहाँ ले आएँ)॥21॥ | ramayan सर्ग 3.43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि अपने पति को स्वेच्छा से इस कार्य में प्रवृत्त करना घोर अत्याचार है और पतिव्रता स्त्रियों के लिए उचित नहीं माना जाता, तथापि इस पशु के शरीर ने मेरे हृदय में भय उत्पन्न कर दिया है (इसीलिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप इसे पकड़कर यहाँ ले आएँ)॥21॥
'Although voluntarily inducing your husband to engage in such work is a terrible act of tyranny and is not considered appropriate for virtuous women, yet the body of this animal has created awe in my heart (that is why I request you to catch it and bring it here)'॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥