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ramayan 3.43.18: 'प्रभो! इस मृग का यह दिव्य रूप भरत, आपको, मेरी सासों और मुझे भी आश्चर्यचकित करने वाला होगा।   |   ramayan सर्ग 3.43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 43: कपटमृग को देखकर लक्ष्मण का संदेह, सीता का उस मृग को ले आने के लिये श्रीराम को प्रेरित करना, लक्ष्मण को सीता की रक्षा का भार सौंप राम का मृग के लिये जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.43.18 
भरतस्यार्यपुत्रस्य श्वश्रूणां मम च प्रभो।
मृगरूपमिदं दिव्यं विस्मयं जनयिष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! इस मृग का यह दिव्य रूप भरत, आपको, मेरी सासों और मुझे भी आश्चर्यचकित करने वाला होगा।
 
'Lord! This divine form of this deer will be astonishing for Bharat, you, my mother-in-laws and me too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)