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ramayan 3.42.7: 'मेरा रत्नजटित रथ तैयार है, उसे राक्षसों के समान मुख वाले गधे खींच रहे हैं, आओ और शीघ्र ही मेरे साथ इस पर बैठो।   |   ramayan सर्ग 3.42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.42.7 
आरुह्यतामयं शीघ्रं खगो रत्नविभूषित:।
मया सह रथो युक्त: पिशाचवदनै: खरै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'मेरा रत्नजटित रथ तैयार है, उसे राक्षसों के समान मुख वाले गधे खींच रहे हैं, आओ और शीघ्र ही मेरे साथ इस पर बैठो।
 
'My chariot decorated with gems is ready, it is drawn by donkeys having faces like those of demons, come and sit with me on it quickly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)