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ramayan 3.42.5: मारीच की बात सुनकर राक्षस रावण बहुत प्रसन्न हुआ और उसने उसे कसकर गले लगा लिया और इस प्रकार बोला -॥5॥   |   ramayan सर्ग 3.42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.42.5 
प्रहृष्टस्त्वभवत् तेन वचनेन स राक्षस:।
परिष्वज्य सुसंश्लिष्टमिदं वचनमब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मारीच की बात सुनकर राक्षस रावण बहुत प्रसन्न हुआ और उसने उसे कसकर गले लगा लिया और इस प्रकार बोला -॥5॥
 
The demon Ravana was very pleased with Maricha's words. He hugged him tightly and said thus -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)