Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.42.30-31: उसी समय, मत्सर से भरे हुए सुन्दर नेत्रों वाली विदेहनन्दिनी सीता, जो फूल तोड़ने में व्यस्त थीं, कनेर, अशोक और आम के वृक्षों पर से कूदती हुई वहाँ आईं।   |   ramayan सर्ग 3.42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  3.42.30-31 
तस्मिन् नेव तत: काले वैदेही शुभलोचना॥ ३०॥
कुसुमापचये व्यग्रा पादपानत्यवर्तत।
कर्णिकारानशोकांश्च चूतांश्च मदिरेक्षणा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उसी समय, मत्सर से भरे हुए सुन्दर नेत्रों वाली विदेहनन्दिनी सीता, जो फूल तोड़ने में व्यस्त थीं, कनेर, अशोक और आम के वृक्षों पर से कूदती हुई वहाँ आईं।
 
At that very time, Videhanandini Sita, with beautiful eyes filled with intoxication, who was busy picking flowers, came there, jumping over the oleander, asoka and mango trees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)