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राजीवचित्रपृष्ठ: स विरराज महामृग:।
रामाश्रमपदाभ्याशे विचचार यथासुखम्॥ २४॥
अनुवाद
उसकी पीठ कमल के केसर के समान सुनहरे रंग की थी, जिससे वह अत्यन्त सुन्दर दिख रही थी। वह श्री रामचन्द्रजी के आश्रम के निकट सुखपूर्वक विचरण कर रही थी।
Its back was golden in colour like the saffron of a lotus and thus looked very beautiful. It was roaming around happily near the hermitage of Shri Ramchandraji.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥