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रौप्यैर्बिन्दुशतैश्चित्रं भूत्वा च प्रियदर्शन:।
विटपीनां किसलयान् भक्षयन् विचचार ह॥ २२॥
अनुवाद
वह हिरण सैकड़ों चाँदी के बिन्दुओं वाला विचित्र रूप धारण करके बड़ा प्यारा लग रहा था। वह इधर-उधर घूमकर पेड़ों के कोमल पत्ते खाने लगा।
That deer appeared very cute after assuming a strange form with hundreds of silver dots. It started roaming here and there eating the soft leaves of the trees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥