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ramayan 3.42.2: 'यदि सदैव धनुष, बाण और तलवार से सुसज्जित रहने वाले भगवान राम मुझे पुनः देख लें, तो मेरा जीवन समाप्त हो जाएगा॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 3.42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.42.2 
दृष्टश्चाहं पुनस्तेन शरचापासिधारिणा।
मद्वधोद्यतशस्त्रेण निहतं जीवितं च मे॥ २॥
 
 
अनुवाद
'यदि सदैव धनुष, बाण और तलवार से सुसज्जित रहने वाले भगवान राम मुझे पुनः देख लें, तो मेरा जीवन समाप्त हो जाएगा॥ 2॥
 
'If Lord Rama, who is always armed with bow, arrow and sword, sees me again, then my life will come to an end.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)