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मनोहरस्निग्धवर्णो रत्नैर्नानाविधैर्वृत:।
क्षणेन राक्षसो जातो मृग: परमशोभन:॥ १९॥
अनुवाद
उसके शरीर की कांति अत्यंत सुंदर और सुकुमार थी। वह नाना प्रकार के रत्नों से विभूषित प्रतीत होता था। राक्षस मारीच क्षण भर में ही अत्यंत सुंदर मृग में बदल गया।
The glow of his body was very beautiful and smooth. He appeared to be adorned with various kinds of gemstones. The demon Marich turned into a very beautiful deer in a moment.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥