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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.42.13-14h 
एतद् रामाश्रमपदं दृश्यते कदलीवृतम्॥ १३॥
क्रियतां तत् सखे शीघ्रं यदर्थं वयमागता:।
 
 
अनुवाद
'मित्र! मुझे केले के वृक्षों से घिरा हुआ राम का आश्रम दिखाई दे रहा है। अब तुम शीघ्रता से वह कार्य करो जिसके लिए हम यहाँ आए हैं।'॥13 1/2॥
 
‘Friend! I can see Rama's hermitage surrounded by banana trees. Now quickly do the work for which we have come here.'॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)