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ramayan 3.42.10-12h: मार्ग में पहले की भाँति अनेक बंदरगाह, वन, पर्वत, नदियाँ, राष्ट्र और नगरों को देखकर दोनों ने दण्डकारण्य में प्रवेश किया और वहाँ राक्षसराज रावण ने मारीच के साथ श्री रामचन्द्र जी का आश्रम देखा।।10-11 1/2।।   |   ramayan सर्ग 3.42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 10-12h
 
 
श्लोक  3.42.10-12h 
तथैव तत्र पश्यन्तौ पत्तनानि वनानि च॥ १०॥
गिरींश्च सरित: सर्वा राष्ट्राणि नगराणि च।
समेत्य दण्डकारण्यं राघवस्याश्रमं तत:॥ ११॥
ददर्श सहमारीचो रावणो राक्षसाधिप:।
 
 
अनुवाद
मार्ग में पहले की भाँति अनेक बंदरगाह, वन, पर्वत, नदियाँ, राष्ट्र और नगरों को देखकर दोनों ने दण्डकारण्य में प्रवेश किया और वहाँ राक्षसराज रावण ने मारीच के साथ श्री रामचन्द्र जी का आश्रम देखा।।10-11 1/2।।
 
Seeing numerous ports, forests, mountains, rivers, nations and cities on the way as before, both of them entered Dandakaranya and there the demon king Ravana along with Maricha saw the ashram of Shri Ramchandra ji. 10-11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)