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ramayan 3.42.1: रावण से ऐसे कठोर वचन कहकर राक्षसराज के भय से दुःखी मारीच ने कहा, 'चलो चलें।'   |   ramayan सर्ग 3.42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.42.1 
एवमुक्त्वा तु परुषं मारीचो रावणं तत:।
गच्छावेत्यब्रवीद् दीनो भयाद् रात्रिंचरप्रभो:॥ १॥
 
 
अनुवाद
रावण से ऐसे कठोर वचन कहकर राक्षसराज के भय से दुःखी मारीच ने कहा, 'चलो चलें।'
 
Having spoken such harsh words to Ravana, Maricha, who was saddened by the fear of the king of demons, said, 'Let us go.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)