vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 41: मारीच का रावण को विनाश का भय दिखाकर पुनः समझाना
»
श्लोक 2
श्लोक
3.41.2
केनायमुपदिष्टस्ते विनाश: पापकर्मणा।
सपुत्रस्य सराज्यस्य सामात्यस्य निशाचर॥ २॥
अनुवाद
'निश्चर! किस पापी ने तुम्हें यह मार्ग बताया है, जिससे तुम अपने पुत्र, राज्य और मन्त्रियों सहित नष्ट हो जाओगे?
'Nishchar! Which sinner has shown you this path that will lead to your destruction along with your son, kingdom and ministers?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×