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ramayan 3.40.2: काल से प्रेरित होकर दैत्यराज ने सत्य और हितकारी बात कहने वाले मारीच से अनुचित और कठोर स्वर में कहा- ॥2॥   |   ramayan सर्ग 3.40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.40.2 
तं पथ्यहितवक्तारं मारीचं राक्षसाधिप:।
अब्रवीत् परुषं वाक्यमयुक्तं कालचोदित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
काल से प्रेरित होकर दैत्यराज ने सत्य और हितकारी बात कहने वाले मारीच से अनुचित और कठोर स्वर में कहा- ॥2॥
 
Inspired by time, the king of demons spoke in an inappropriate and harsh tone to Maricha, who was telling the truth and beneficial thing - ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)