श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध का वध  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  3.4.23-24h 
अवटे ये निधीयन्ते तेषां लोका: सनातना:।
एवमुक्त्वा तु काकुत्स्थं विराध: शरपीडित:॥ २३॥
बभूव स्वर्गसम्प्राप्तो न्यस्तदेहो महाबल:।
 
 
अनुवाद
‘गड्ढे में दबे हुए राक्षस सनातन लोकों को प्राप्त होते हैं।’ श्री रामजी से ऐसा कहकर महाबली विराध बाणों से घायल होकर उस शरीर को (गड्ढे में डाले जाने पर) छोड़कर स्वर्गलोक को चला गया।॥23 1/2॥
 
'The demons who are buried in a pit attain the eternal worlds.' Having said this to Sri Rama, the mighty Viradha, struck by arrows, left that body (when his body was thrown into the pit) and went to the heavenly world.॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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