श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध का वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.4.2 
एष दाशरथी राम: सत्यवाञ्छीलवान् शुचि:।
रक्षसा रौद्ररूपेण ह्रियते सहलक्ष्मण:॥ २॥
 
 
अनुवाद
'हाय! सत्यनिष्ठ, सदाचारी और शुद्ध आचरण वाले दशरथनंदन श्री राम और लक्ष्मण को यह उग्ररूपी राक्षस हर ले जा रहा है॥2॥
 
'Hi! Dashrath Nandan Shri Ram and Lakshman, who were truthful, virtuous and had pure morals, are being taken away by this demon in the form of fierceness. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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