श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.37.7 
त्वद्विध: कामवृत्तो हि दु:शील: पापमन्त्रित:।
आत्मानं स्वजनं राष्ट्रं स राजा हन्ति दुर्मति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हारे समान दुष्ट, स्वेच्छाचारी, पाप विचार वाले और मिथ्या बुद्धि वाला राजा अपना, अपने बन्धुओं का तथा सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर डालता है॥ 7॥
 
'A king like you, who is wicked, willful, has sinful thoughts and has a wrong intellect, brings about the destruction of himself, his relatives and the entire nation.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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