Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.37.15: 'श्री राम प्रज्वलित अग्नि के समान हैं। बाण उस अग्नि की ज्वाला हैं। धनुष और तलवार उसमें ईंधन का काम करते हैं। तुम्हें युद्ध के लिए उस अग्नि में अचानक प्रवेश नहीं करना चाहिए।॥15॥ | ramayan सर्ग 3.37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शरार्चिषमनाधृष्यं चापखड्गेन्धनं रणे।
रामाग्निं सहसा दीप्तं न प्रवेष्टुं त्वमर्हसि॥ १५॥
अनुवाद
'श्री राम प्रज्वलित अग्नि के समान हैं। बाण उस अग्नि की ज्वाला हैं। धनुष और तलवार उसमें ईंधन का काम करते हैं। तुम्हें युद्ध के लिए उस अग्नि में अचानक प्रवेश नहीं करना चाहिए।॥15॥
'Shri Ram is like a blazing fire. The arrows are the flames of that fire. The bow and the sword act as fuel for it. You should not suddenly enter that fire for battle.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥