Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.37.14: 'उनकी पत्नी, विदेह की राजकुमारी सीता, अपने पतिव्रता तेज से ही सुरक्षित हैं। जैसे सूर्य का तेज उनसे अलग नहीं हो सकता, वैसे ही सीता को श्री राम से अलग करना असंभव है। ऐसी स्थिति में, आप उनका बलपूर्वक अपहरण कैसे करना चाहते हैं?॥ 14॥ | ramayan सर्ग 3.37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं नु तस्य वैदेहीं रक्षितां स्वेन तेजसा।
इच्छसे प्रसभं हर्तुं प्रभामिव विवस्वत: ॥ १ ४॥
अनुवाद
'उनकी पत्नी, विदेह की राजकुमारी सीता, अपने पतिव्रता तेज से ही सुरक्षित हैं। जैसे सूर्य का तेज उनसे अलग नहीं हो सकता, वैसे ही सीता को श्री राम से अलग करना असंभव है। ऐसी स्थिति में, आप उनका बलपूर्वक अपहरण कैसे करना चाहते हैं?॥ 14॥
‘His wife, the princess of Videha, Sita, is protected by the brilliance of her own fidelity to her husband. Just as the radiance of the sun cannot be separated from it, similarly it is impossible to separate Sita from Shri Ram. In such a situation, how do you want to abduct her by force?॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥