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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 36: रावण का मारीच से श्रीराम के अपराध बताकर उनकी पत्नी सीता के अपहरण में सहायता के लिये कहना  »  श्लोक 8-10h
 
 
श्लोक  3.36.8-10h 
चतुर्दश सहस्राणि रक्षसामुग्रतेजसाम्॥ ८॥
निहतानि शरैर्दीप्तैर्मानुषेण पदातिना।
खरश्च निहत: संख्ये दूषणश्च निपातित:॥ ९॥
हत्वा त्रिशिरसं चापि निर्भया दण्डका: कृता:।
 
 
अनुवाद
पैदल और मानव होते हुए भी राम ने अपने चमकदार बाणों से चौदह हज़ार भयंकर राक्षसों का नाश किया और उसी युद्ध में खर और दूषण का वध किया। त्रिशिरा का वध करके उन्होंने दण्डकारण्य को अन्यों के लिए निर्भय बना दिया। 8-9 1/2।
 
‘Even though he was on foot and a human, Rama destroyed fourteen thousand fierce demons with his shining arrows and in the same battle he killed Khara and Dushan. Also, by killing Trishira he made Dandakaranya fearless for others. 8-9 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)