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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 36: रावण का मारीच से श्रीराम के अपराध बताकर उनकी पत्नी सीता के अपहरण में सहायता के लिये कहना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.36.7-8h 
नानाशस्त्रप्रहरणा: खरप्रमुखराक्षसा:।
तेन संजातरोषेण रामेण रणमूर्धनि॥ ७॥
अनुक्त्वा परुषं किंचिच्छरैर्व्यापारितं धनु:।
 
 
अनुवाद
'खर आदि राक्षस नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण थे, किन्तु युद्ध के समय क्रोध में भरे हुए राम ने एक शब्द भी कठोर नहीं कहा, अपितु धनुष-बाण चलाना आरम्भ कर दिया।
 
'Those demons like Khara etc. were skilled in using various kinds of weapons, but at the brink of battle, Rama, filled with rage, did not utter a harsh word but began using his bow and arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)