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ramayan 3.36.4: ‘वे सब राक्षस मेरी आज्ञा से वहाँ अपने घर बनाकर रहते थे और उस विशाल वन में धर्म के मार्ग पर चलने वाले ऋषियों को कष्ट देते थे।॥4॥   |   ramayan सर्ग 3.36: रावण का मारीच से श्रीराम के अपराध बताकर उनकी पत्नी सीता के अपहरण में सहायता के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.36.4 
वसन्ति मन्नियोगेन अधिवासं च राक्षसा:।
बाधमाना महारण्ये मुनीन् ये धर्मचारिण:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘वे सब राक्षस मेरी आज्ञा से वहाँ अपने घर बनाकर रहते थे और उस विशाल वन में धर्म के मार्ग पर चलने वाले ऋषियों को कष्ट देते थे।॥4॥
 
‘All those demons built their homes there by my order and used to harass the sages who were following the path of Dharma in that huge forest.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)