Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.35.15: समुद्र का वह तट काम को जीतने वाले सिद्धों, भाटों, ब्रह्माजी के पुत्रों, वानप्रस्थों, माषगोत्र में उत्पन्न ऋषियों, बालखिल्य महात्माओं और केवल सूर्य की किरणों का पान करने वाले तपस्वियों से भी सुशोभित हो रहा था॥15॥ | ramayan सर्ग 3.35: रावण का समुद्रतटवर्ती प्रान्त की शोभा देखते हुए पुनः मारीच के पास जाना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समुद्र का वह तट काम को जीतने वाले सिद्धों, भाटों, ब्रह्माजी के पुत्रों, वानप्रस्थों, माषगोत्र में उत्पन्न ऋषियों, बालखिल्य महात्माओं और केवल सूर्य की किरणों का पान करने वाले तपस्वियों से भी सुशोभित हो रहा था॥15॥
That shore of the ocean was also being adorned with the Siddhas who conquered lust, the bards, the sons of Brahmaji, the Vanaprasthas, the sages born in the Maash Gotra, the Balkhilya Mahatmas and the ascetics who drank only the sun rays. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥