श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 34: रावण के पूछने पर शर्पणखा का उससे राम, लक्ष्मण और सीता का परिचय देते हुए सीता को भार्या बनाने के लिये उसे प्रेरित करना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.34.7-8h 
नाददानं शरान् घोरान् विमुञ्चन्तं महाबलम्॥ ७॥
न कार्मुकं विकर्षन्तं रामं पश्यामि संयुगे।
 
 
अनुवाद
मैं युद्धस्थल में यह नहीं देख पाया कि महाबली राम कब धनुष खींचेंगे, कब हाथ में भयंकर बाण लेंगे और कब उन्हें छोड़ेंगे॥7 1/2॥
 
‘I was unable to see on the battlefield when the mighty Rama would draw his bow, when he would take the dreadful arrows in his hand and when he would release them.॥ 7 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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