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श्लोक 3.34.26  |
निशम्य रामेण शरैरजिह्मगै-
र्हताञ्जनस्थानगतान् निशाचरान्।
खरं च दृष्ट्वा निहतं च दूषणं
त्वमद्य कृत्यं प्रतिपत्तुमर्हसि॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| 'श्री रामजी ने अपने सीधे बाणों से जनस्थान में रहने वाले समस्त रात्रिचर जीवों को मार डाला तथा खर और दूषण को भी मार डाला। यह सब सुनकर और देखकर अब तुम अपना कर्तव्य क्या है, इसका निश्चय करो।'॥ 26॥ |
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| 'With his straight arrows, Shri Rama killed all the nocturnal creatures living in Janasthan and also killed Khar and Dushan. Having heard and seen all this, you should now decide what your duty is.'॥ 26॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे चतुस्त्रिंश: सर्ग: ॥ ३ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें चौंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ४॥ |
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