श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 34: रावण के पूछने पर शर्पणखा का उससे राम, लक्ष्मण और सीता का परिचय देते हुए सीता को भार्या बनाने के लिये उसे प्रेरित करना  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  3.34.13-14 
भ्राता चास्य महातेजा गुणतस्तुल्यविक्रम:।
अनुरक्तश्च भक्तश्च लक्ष्मणो नाम वीर्यवान्॥ १३॥
अमर्षी दुर्जयो जेता विक्रान्तो बुद्धिमान् बली।
रामस्य दक्षिणो बाहुर्नित्यं प्राणो बहिश्चर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उसका एक बड़ा ही तेजस्वी भाई है, जो गुण और पराक्रम में उसी के समान है। उसका नाम लक्ष्मण है। वह वीर योद्धा अपने बड़े भाई का प्रेमी और भक्त है, उसकी बुद्धि बड़ी तीक्ष्ण है, वह असंयमी है, उसे हराना कठिन है, वह विजयी है, वह बल और पराक्रम से युक्त है। वह श्री राम के दाहिने हाथ के समान है और उसकी प्राणशक्ति सदैव बाहर ही विचरण करती रहती है॥13-14॥
 
‘He has a very brilliant brother, who is equal to him in virtue and valour. His name is Lakshman. That valiant warrior is a lover and devotee of his elder brother, his intellect is very sharp, he is intemperate, difficult to defeat, victorious and is full of strength and valour. He is like the right hand of Shri Ram and his life force which always roams outside.॥ 13-14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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