श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 32: शूर्पणखा का लंका में रावण के पास जाना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.32.13-14h 
सर्वदिव्यास्त्रयोक्तारं यज्ञविघ्नकरं सदा।
पुरीं भोगवतीं गत्वा पराजित्य च वासुकिम्॥ १३॥
तक्षकस्य प्रियां भार्यां पराजित्य जहार य:।
 
 
अनुवाद
वह सब प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग करने वाला था और सदैव यज्ञों में विघ्न उत्पन्न करता था। एक बार उसने पाताल में भोगवती पुरी में जाकर नागराज वासुकि को तथा तक्षक को भी परास्त करके अपनी प्रिय पत्नी को वापस ले आया॥13 1/2॥
 
He was the user of all types of divine weapons and always created obstacles in sacrifices. Once he went to Bhogavati Puri in Patala and defeated Nagraj Vasuki and also defeated Takshak and brought back his beloved wife.॥ 13 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas