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श्लोक 3.31.6  |
कालस्य चाप्यहं कालो दहेयमपि पावकम्।
मृत्युं मरणधर्मेण संयोजयितुमुत्सहे॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| 'मैं मृत्यु का भी काल हूँ; मैं अग्नि को जला सकता हूँ और मृत्यु को भी मृत्यु के मुँह में डाल सकता हूँ।॥6॥ |
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| 'I am the death of death; I can burn the fire and can even put death into the mouth of death.॥ 6॥ |
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