श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का अकम्पन की सलाह से सीता का अपहरण करने के लिये जाना और मारीच के कहने से लङ्का को लौट आना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.31.28 
न तं वध्यमहं मन्ये सर्वैर्देवासुरैरपि।
अयं तस्य वधोपायस्तन्ममैकमना: शृणु॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मेरी राय में तो देवता और दानव मिलकर भी उसे नहीं मार सकते। मैंने उसे मारने का उपाय खोज लिया है। तुम ध्यानपूर्वक मुझसे उसे सुनो॥ 28॥
 
‘In my opinion, even all the gods and demons combined cannot kill him. I have found a way to kill him. Listen to it from me with all your attention.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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