श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का अकम्पन की सलाह से सीता का अपहरण करने के लिये जाना और मारीच के कहने से लङ्का को लौट आना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  3.31.23-24h 
असाध्य: कुपितो रामो विक्रमेण महायशा:।
आपगायास्तु पूर्णाया वेगं परिहरेच्छरै:॥ २३॥
सताराग्रहनक्षत्रं नभश्चाप्यवसादयेत्।
 
 
अनुवाद
यदि महाबली श्री रामजी क्रोधित हो जाएँ, तो उनके पराक्रम से कोई भी उन्हें वश में नहीं कर सकता। वे अपने बाणों से नदी का प्रवाह उलट सकते हैं तथा तारों, ग्रहों और नक्षत्रों सहित सम्पूर्ण आकाश को व्यथित कर सकते हैं।॥23 1/2॥
 
‘If the mighty Shri Ram becomes angry, no one can control him by his might. He can reverse the flow of a river with his arrows and can torment the entire sky including the stars, planets and constellations.॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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