श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का अकम्पन की सलाह से सीता का अपहरण करने के लिये जाना और मारीच के कहने से लङ्का को लौट आना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  3.31.19-20 
येन येन च गच्छन्ति राक्षसा भयकर्षिता:॥ १९॥
तेन तेन स्म पश्यन्ति राममेवाग्रत: स्थितम्।
इत्थं विनाशितं तेन जनस्थानं तवानघ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ-जहाँ राक्षसगण भयभीत होकर भागते थे, वहाँ-वहाँ उन्हें भगवान् रामजी अपने सामने खड़े दिखाई देते थे। हे पापी! इस प्रकार भगवान् राम ने ही तुम्हारे जनस्थान का नाश किया है।॥19-20॥
 
'Wherever the demons fled in fear, they saw Lord Rama standing in front of them. O sinful one! In this way, Lord Rama alone has destroyed your Janasthan.'॥19-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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