vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 31: रावण का अकम्पन की सलाह से सीता का अपहरण करने के लिये जाना और मारीच के कहने से लङ्का को लौट आना
»
श्लोक 12
श्लोक
3.31.12
अकम्पनवच: श्रुत्वा रावणो राक्षसाधिप:।
नागेन्द्र इव नि:श्वस्य इदं वचनमब्रवीत्॥ १२॥
अनुवाद
अकम्पन के ये वचन सुनकर राक्षसराज रावण ने सर्पराज के समान गहरी साँस लेकर इस प्रकार कहा-॥12॥
On hearing these words of Akampana, the king of demons Ravana took a deep breath like the king of serpents and said thus -॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×