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ramayan 3.30.33-34h: ऐसा कहकर सब देवता जिस प्रकार आए थे, उसी प्रकार चले गए। तत्पश्चात अगस्त्य आदि बहुत से राजर्षि और महर्षि एक साथ वहाँ आए और उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक श्री राम का स्वागत किया तथा उनसे इस प्रकार बोले -॥33 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.30: श्रीराम के व्यङ्ग करने पर खर का उनके ऊपर साल वृक्ष का प्रहार करना, श्रीराम का तेजस्वी बाण से खर को मार गिराना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम के व्यङ्ग करने पर खर का उनके ऊपर साल वृक्ष का प्रहार करना, श्रीराम का तेजस्वी बाण से खर को मार गिराना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  3.30.33-34h 
इत्येवमुक्त्वा ते सर्वे ययुर्देवा यथागतम्।
ततो राजर्षय: सर्वे संगता: परमर्षय:॥ ३३॥
सभाज्य मुदिता रामं सागस्त्या इदमब्रुवन्।
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर सब देवता जिस प्रकार आए थे, उसी प्रकार चले गए। तत्पश्चात अगस्त्य आदि बहुत से राजर्षि और महर्षि एक साथ वहाँ आए और उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक श्री राम का स्वागत किया तथा उनसे इस प्रकार बोले -॥33 1/2॥
 
Having said this, all the gods went away in the same manner as they had come. Thereafter many Rajarshis and Maharshis like Agastya etc. came there together and welcomed Shri Ram happily and spoke to him in this manner -॥ 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)