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ramayan 3.30.21: उस राक्षस के शरीर पर उन बाणों के घावों से बहुत सा फेनयुक्त रक्त बहने लगा, मानो किसी पर्वतीय झरने से जल की धाराएँ गिर रही हों ॥21॥   |   ramayan सर्ग 3.30: श्रीराम के व्यङ्ग करने पर खर का उनके ऊपर साल वृक्ष का प्रहार करना, श्रीराम का तेजस्वी बाण से खर को मार गिराना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम के व्यङ्ग करने पर खर का उनके ऊपर साल वृक्ष का प्रहार करना, श्रीराम का तेजस्वी बाण से खर को मार गिराना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.30.21 
तस्य बाणान्तराद् रक्तं बहु सुस्राव फेनिलम्।
गिरे: प्रस्रवणस्येव धाराणां च परिस्रव:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस राक्षस के शरीर पर उन बाणों के घावों से बहुत सा फेनयुक्त रक्त बहने लगा, मानो किसी पर्वतीय झरने से जल की धाराएँ गिर रही हों ॥21॥
 
From the wounds caused by those arrows on the body of that demon, a lot of foamy blood began to flow out, as if streams of water were falling from a mountain spring. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)