श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 28: खर के साथ श्रीराम का घोर युद्ध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.28.4 
विकृष्य बलवच्चापं नाराचान् रक्तभोजनान्।
खरश्चिक्षेप रामाय क्रुद्धानाशीविषानिव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
खर ने एक प्रबल धनुष खींचकर श्री राम पर रक्तपान करने वाले बहुत से बाण छोड़े। वे सब बाण क्रोध में भरे हुए विषैले सर्पों के समान प्रतीत हो रहे थे॥4॥
 
Khara drew a strong bow and shot many arrows at Shri Ram, which were meant to drink blood. All those arrows looked like poisonous serpents filled with fury.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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