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ramayan 3.28.18: खरके द्वारा छोड़े गए सुगठित बाणों से कटकर सूर्य के समान तेजस्वी श्री रामजी का कवच पृथ्वी पर गिर पड़ा ॥18॥   |   ramayan सर्ग 3.28: खर के साथ श्रीराम का घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 28: खर के साथ श्रीराम का घोर युद्ध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.28.18 
ततस्तत्प्रहतं बाणै: खरमुक्तै: सुपर्वभि:।
पपात कवचं भूमौ रामस्यादित्यवर्चसम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
खरके द्वारा छोड़े गए सुगठित बाणों से कटकर सूर्य के समान तेजस्वी श्री रामजी का कवच पृथ्वी पर गिर पड़ा ॥18॥
 
Sri Rama's armour, as brilliant as the sun, fell to the earth after being cut by the well-knotted arrows shot by Kharake. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)