श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम के द्वारा दूषण सहित चौदह सहस्र राक्षसों का वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.26.30 
ते रुक्मपुङ्खा विशिखा: सधूमा इव पावका:।
निजघ्नुस्तानि रक्षांसि वज्रा इव महाद्रुमान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जैसे वज्र बड़े-बड़े वृक्षों को नष्ट कर देते हैं, उसी प्रकार उन सुवर्णमय पंखवाले बाणों ने धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान प्रकट होकर उन समस्त राक्षसों को नष्ट कर दिया ॥30॥
 
Just as thunderbolts destroy huge trees, similarly those golden-feathered arrows, appearing like smoke-filled fire, destroyed all those demons. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)