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ramayan 3.25.9-10h: वे मेघ के समान काले, विशाल और पराक्रमी राक्षस, पर्वत शिखरों के समान रथों, घोड़ों और हाथियों द्वारा ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम पर चारों ओर से आक्रमण करने लगे। वे उन्हें युद्ध में मार डालना चाहते थे॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.25: राक्षसों का श्रीराम पर आक्रमण और श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.25.9-10h 
ते बलाहकसंकाशा महाकाया महाबला:।
अभ्यधावन्त काकुत्स्थं रथैर्वाजिभिरेव च॥ ९॥
गजै: पर्वतकूटाभै रामं युद्धे जिघांसव:।
 
 
अनुवाद
वे मेघ के समान काले, विशाल और पराक्रमी राक्षस, पर्वत शिखरों के समान रथों, घोड़ों और हाथियों द्वारा ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम पर चारों ओर से आक्रमण करने लगे। वे उन्हें युद्ध में मार डालना चाहते थे॥9 1/2॥
 
Those black as clouds, huge and mighty demons attacked Shri Ram, the jewel of the Kakutstha clan, from all sides with chariots, horses and elephants like mountain peaks. They wanted to kill him in the battle.॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)