श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसों का श्रीराम पर आक्रमण और श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.25.5 
स तेषां यातुधानानां मध्ये रथगत: खर:।
बभूव मध्ये ताराणां लोहिताङ्ग इवोदित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उन राक्षसों के बीच रथ पर बैठा हुआ खर तारों के बीच उदित होते हुए मंगल के समान शोभा पा रहा था।
 
Seated on a chariot amidst those demons, Khar was looking as beautiful as Mars rising among the stars. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)