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श्लोक  3.25.34-35h 
द्रुमवर्षाणि मुञ्चन्त: शिलावर्षाणि राक्षसा:।
तद् बभूवाद्भुतं युद्धं तुमुलं रोमहर्षणम्॥ ३४॥
रामस्यास्य महाघोरं पुनस्तेषां च रक्षसाम्।
 
 
अनुवाद
कुछ राक्षस वृक्षों की वर्षा करने लगे और कुछ पत्थर बरसाने लगे। उस समय श्री राम और उन राक्षसों के बीच बड़ा ही अद्भुत, भयानक, भयंकर और रोमांचकारी युद्ध होने लगा।
 
Some demons started raining trees and some rained stones. At that time, a very wonderful, terrifying, fierce and thrilling battle started between Shri Ram and those demons. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)