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ramayan 3.25.19-20h: जब राक्षसों के रक्त से सने हुए वे बाण उनके शरीरों को छेदकर आकाश में पहुँचे, तब वे प्रज्वलित अग्नि के समान चमकने लगे॥191/2॥   |   ramayan सर्ग 3.25: राक्षसों का श्रीराम पर आक्रमण और श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.25.19-20h 
भित्त्वा राक्षसदेहांस्तांस्ते शरा रुधिराप्लुता:॥ १९॥
अन्तरिक्षगता रेजुर्दीप्ताग्निसमतेजस:।
 
 
अनुवाद
जब राक्षसों के रक्त से सने हुए वे बाण उनके शरीरों को छेदकर आकाश में पहुँचे, तब वे प्रज्वलित अग्नि के समान चमकने लगे॥191/2॥
 
When those arrows, soaked in the blood of the demons, pierced their bodies and reached the sky, they started shining as brightly as a blazing fire.॥191/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)