Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.25.13-14h: यद्यपि उन राक्षसों के भयंकर अस्त्रों से श्री रामजी का शरीर क्षत-विक्षत हो गया था, फिर भी वे व्याकुल या विचलित नहीं हुए, जैसे कोई महान पर्वत अनेक तेजस्वी वज्रों के प्रहार से भी अविचलित रहता है। 13 1/2॥ | ramayan सर्ग 3.25: राक्षसों का श्रीराम पर आक्रमण और श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा राक्षसों का संहार । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तै: प्रहरणैर्घोरैर्भिन्नगात्रो न विव्यथे॥ १३॥
राम: प्रदीप्तैर्बहुभिर्वज्रैरिव महाचल:।
अनुवाद
यद्यपि उन राक्षसों के भयंकर अस्त्रों से श्री रामजी का शरीर क्षत-विक्षत हो गया था, फिर भी वे व्याकुल या विचलित नहीं हुए, जैसे कोई महान पर्वत अनेक तेजस्वी वज्रों के प्रहार से भी अविचलित रहता है। 13 1/2॥
Even though Shri Ram's body was mutilated by the fierce weapons of those demons, he did not get distressed or disturbed, just as a great mountain remains unshakable even after being hit by numerous resplendent thunderbolts. 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥